2. दावे दो प्रकार के हो सकते हैं:
a. बीमित व्यक्ति के जीवित रहने पर भी उत्तरजीविता दावे देय होते हैं और
b. मृत्यु दावा
3. दावों के प्रकार:
4. उत्तरजीविता लाभों का भुगतान
5. पॉलिसी का समर्पण
6. राइडर लाभ
7. परिपक्वता दावा: इस तरह के दावों में बीमा कंपनी अवधि के अंत में बीमाधारक को एक निर्धारित राशि का भुगतान करने का वचन देती है, अगर बीमाधारक योजना की पूरी अवधि में जीवित रहता है। इसे परिपक्वता दावे के रूप में जाना जाता है ।
a. सहभागी योजनाः किसी सहभागी योजना के अंतर्गत परिपक्कता दावे के रूप में देय राशि संचित बोनस सहित बीमा राशि होती है इसमें से बकाया रहा प्रीमियम तथा पॉलिसी ऋण ब्याज सहित कम कर दिया जाता है ।
b. प्रीमियम की वापसी (आरओपी) योजनाः कुछ मामलों में पॉलिसी की पूरी अवधि में भुगतान किए गए प्रीमियम पॉलिसी परिपक्व होने पर वापस कर दिए जाते हैं ।
c. यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (यूलिप): यूलिप के मामले में, बीमा कंपनी परिपक्वता दावे के रूप में फंड मूल्य का भुगतान करती है ।
d. मनी-बैक योजनाः मनी-बैक पॉलिसी के मामले में बीमा कंपनी परिपक्वता दावे में से पॉलिसी की पूरी अवधि के दौरान दिये उत्तरजीविता लाभ को घटाकर भुगतान करती है। दावे का भुगतान किए जाने के बाद बीमा अनुबंध समाप्त हो जाता है।
8. मृत्यु दावा
9. बीमा अधिनियम की धारा 45 (निर्विवादिता क्लॉज) बीमा कंपनी द्वारा दावे के अस्वीकरण से बीमाधारक की रक्षा करता है, बशर्ते कि पॉलिसी ने 3 वर्ष पूरे कर लिए हों और बीमाधारक ने किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को नहीं छुपाया हो।
आईआरडीएआई (पॉलिसीधारक के हितों का संरक्षण) विनियम, 2002 के तहत, आईआरडीएआई ने दावों के मामले में बीमाधारक या लाभार्थी की सुरक्षा / बचाव के लिए विनियम निर्धारित किए हैं।
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