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स्वास्थ्य बीमा दावे 🌿🌿🌿🌿




1.    बीमा क्षेत्र में दावा प्रबंधनबीमा एक 'वादाहै और पॉलिसी उस वादे के लिए एक 'गवाहहै। एक बीमा कंपनी कितना अच्छा प्रदर्शन करती है इसका मूल्यांकन इस बात से होता है कि वह अपने दावों के वादों को कितनी अच्छी तरह से पूरा करती है। बीमा में महत्वपूर्ण रेटिंग कारकों में से एक बीमा कंपनी की दावा भुगतान करने की क्षमता है।

2.    दावा प्रक्रिया में हितधारकदावों का प्रबंधन कैसे किया जाता है इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानने से पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि दावों की प्रक्रिया में इच्छुक पार्टियां कौन-कौन हैं।


a.    ग्राहक

b.    मालिक

c.     बीमालेखक

d.    नियामक

e.    तृतीय पक्ष व्यवस्थापक

f.      बीमा एजेंट / ब्रोकर

g.    प्रदाता/अस्पताल

3.    बीमा कंपनी में दावा प्रबंधन की भूमिका: "विभिन्न बीमा कंपनियों का स्वास्थ्य बीमा के नुकसान का अनुपात 65% से लेकर 120% के ऊपर तक है जहां बाजार का अधिकांश हिस्सा 100% नुकसान के अनुपात से ऊपर काम कर रहा है।"

4.    स्वास्थ्य बीमा में दावे की प्रक्रिया:

a.    क्षतिपूर्ति पॉलिसी के तहत किया जाने वाला दावा इस प्रकार हो सकता है:

b.    कैशलेस (नकदी रहित) दावा

c.     प्रतिपूर्ति दावा

5.    स्वास्थ्य बीमा दावों में दस्तावेज़ तैयार करना:स्वास्थ्य बीमा संबंधी दावों को पूरा करने के लिए कई दस्तावेजों की जरुरत पड़ती है। हर एक दस्तावेज में मूलतः दो प्रश्नों का उत्तर देने में सहायक होने की अपेक्षा की जाती है - स्वीकार्यता (क्या यह देय है?) और दावे का आकार (कितना?) यह खंड ग्राहकों द्वारा जमा किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों और विषय वस्तु का उल्लेख करता है।

6.    डिस्चार्ज समरीडिस्चार्ज समरी को स्वास्थ्य बीमा के निष्पादन में सबसे आवश्यक दस्तावेज़ माना जा सकता है। मरीज की स्थिति और उसका इलाज किस तरीके से किया गया हैइस बात की पूरी जानकारी यह दस्तावेज देता है। आई आर डी ए आई के मानकीकरण मार्ग निर्देशों के नुसार मानक डिस्चार्ज समर्थ में निम्न बाते होती है :

a.    रोगी का नाम

b.    दूर भाष/मोबाईल न.

c.     आइपीडी न.

d.    एडमिशन न.

e.    इलाज करने वाले विशेषज्ञ का नाम सम्पर्क सं विभाग - विशेषता

f.      एडमिशन की तारीखसमय के साथ

g.    डिस्चार्ज की तारिख – समय के साथ

h.    एम एल सी / एफ आई आर सं

i.      एडमिशन के समय अनंतिम निशान

j.      डिस्चार्ज के समय अंतिम निदान

k.     आईसीडी – 10 (कोड) कोई अंतिम डिस्चार्ज के लिए अन्य कोई जैसा कि प्राधिकार द्वारा अनुशासित है

l.      अवधि के साथ तकलीफ और एडमिशन का कारण

m.   वर्तमान बीमारी का कारण

n.    एडमिशन के समय परीक्षम से ज्ञात तकलीफ

o.    अलकोहलतम्बाकू या सब्सटांस अब्यूक का इतिहासयदि कोई हो

p.    पूर्व क् म्हत्वपूर्ण चिकित्सा सम्बंधी या भुल्यक्रिया संबंधी इतिहासयदि कोई हो

q.    पारिवारिक इतिहासयदि महत्वपूर्ण हो

r.     अस्पताल में रहने के दौरान महत्वपूर्ण जांच की सारंभ

s.     कोई जटिलता सहितअसपताल में किया गया इलाजयदि कोई हो

t.     डिस्चार्ज के समय सलाह

u.    इलाज करने वाले विशेषज्ञ /प्राधिकृत टीम डॉक्टर का नाम और हस्तक्षार

v.     रोगी /अटेन्डेट का नाम और हस्ताक्षर

7.    ठीक से तैयार की गई छुट्टी का सारांश बीमारी और इलाज की पुख्ता जानकारी देने के साथ ही दावे के शीघ्र निपटारे में काफी सहायक होती है। जिन मामलों में मरीज जीवित नही रह पाता ऐसे में कई अस्पताल छुट्टी का सारांश (डिस्चार्ज समरी) की जगह मृत्यु का सारांश (डेथ समरी) शब्द का इस्तेमाल करते हैं।

8.    जांच रिपोर्ट जांच रिपोर्ट निदान और इलाज की तुलना करने में सहायता करता है और उस सही हालत को समझने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है जिसने अस्पताल में भर्ती होने के दौरान हुए इलाज और प्रगति को प्रेरित किया है। आमतौर पर जांच रिपोर्ट निम्नलिखित रिपोर्ट से मिलकर बनता है:

a.    रक्त परीक्षण की रिपोर्ट

b.    एक्सरे रिपोर्ट

c.     स्कैन की रिपोर्ट और

d.    बायोप्सी रिपोर्ट

9.    दावा प्रपत्र: दावा प्रपत्र को अब आई आर डी आई द्वारा मानकीकृत कर दिया गया है जिनमें मोटे तौर पर निम्न तथ्य शामिल होते हैं।

a.    प्राथमिक बीमा धारक का नाम तथा पॉलिसी सं जिनके अन्तर्गत दावा किया गया है।

b.    बीमा इतिहास का वर्णन

c.     अस्पताल में भर्ती बीमाधारक व्यक्ति का विवरण

d.    अस्पताल में भर्ती होने का विस्तृत विवरणतथा अस्पतालकमरे की श्रेणीएडमिशन और डिस्चार्ज की तारीख और समयदुर्घटना की स्थिति में क्या पुलिस को जानकारी दी गई मेडिसिन का सिस्टम

e.    दावे का विवरण – जिसके लिए भर्ती किया गयाखर्च का ब्रेक अपभर्ती होने के पूर्व और पश्चात की अवधिदावा की गई एक पूश्त राशि नकद लाभ का विवरण

f.      संलग्न बिलो का विवरण

g.    प्राथमिक बीमाधारक के बैंक खाते का विवरण ताकि स्वीकृत राशि भेजी जा सके

h.    बीमित व्यक्ति की घोषणा।

10. तृतीय पक्ष व्यवस्थापक (टीपीए): भारत में टीपीए की शुरुआत बीमा क्षेत्र को वर्ष 2000 में निजी कंपनियों के लिए खोला गया था। इस बीचनए उत्पादों की शुरुआत के साथ स्वास्थ्य देखभाल संबंधी उत्पादों की मांग भी बढ़ रही थी। इसलिए स्वास्थ्य बीमा में बिक्री के बाद की सेवाओं के लिए एक चैनल शुरू करने की जरूरत महसूस की गयी। यह पेशेवर तृतीय पक्ष व्यवस्थापकों की शुरुआत के लिए एक अवसर बन गया।

11. बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने आईआरडीएआई के लाइसेंस के तहत बाजार में टीपीए की शुरुआत की अनुमति दे दीबशर्ते कि वे 17 सितंबर 2001 को अधिसूचित आईआरडीएआई (तृतीय पक्ष व्यवस्थापक - स्वस्थ्य बीमा) विनियम2001 का पालन करते हैं।

12. विनियमों के अनुसार, "तृतीय पक्ष व्यवस्थापक या टीपीए का मतलब है ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे आईआरडीएआई (तृतीय पक्ष व्यवस्थापक - स्वास्थ्य सेवाएं) विनियमन2001 के तहत प्राधिकरण द्वारा लाइसेंस प्राप्त है और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयोजनों सेएक बीमा कंपनी द्वारा एक शुल्क या पारिश्रमिक के बदले काम में लगाया गया।

13. "टीपीए की स्वास्थ्य सेवाओं" का मतलब है स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय के सिलसिले में एक समझौते के तहत बीमा कंपनी को टीपीए द्वारा प्रदान की गई सेवाओं से है।

14. "कैशलेस सुविधा" का मतलब है बीमा कंपनी द्वारा बीमाधारक को प्रदान की गयी ऐसी सुविधा जहां पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार बीमाधारक द्वारा कराए गए उपचार की लागतों का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा पहले से मंजूर प्राधिकार की सीमा तक सीधे नेटवर्क प्रदाता को किया जाता है।

15. कैशलेस दावे में एक नेटवर्क अस्पताल बीमा कंपनी/टीपीए की पूर्व मंजूरी के आधार पर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है और बाद में दावे के निपटान के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करता है।

16. प्रतिपूर्ति दावे मेंग्राहक अपने स्वयं के संसाधनों से अस्पताल का भुगतान करता है और उसके बाद भुगतान के लिए बीमा कंपनी/टीपीए के पास दावा दायर करता है।

17. दावे की सूचना ग्राहक और दावा टीम के बीच संपर्क का पहला दृष्टांत है। अगर किसी बीमा दावे के मामले में बीमा कंपनी द्वारा धोखाधड़ी का संदेह किया जाता हैतो इसे जांच के लिए भेजा जाता है। दावे की जांच एक बीमा कंपनी / टीपीए द्वारा आंतरिक रूप से की जा सकती है या इसे एक पेशेवर जांच एजेंसी को सौंपा जा सकता है।

18. आरक्षण (रिजर्विंग) दावे की स्थिति के आधार पर बीमा कंपनी के बही-खातों में सभी दावों के संबंध में किए जाने वाले प्रावधान की राशि को दर्शाता है।

19. इनकार के मामले में बीमा कंपनी को प्रस्तुत करने के अलावा ग्राहक के पास बीमा लोकपाल (ओम्बड्समैन) या ग्राहक फोरम या यहां तक कि वैधानिक प्राधिकरणों के पास जाने का भी विकल्प होता है।

20. धोखाधड़ी अधिकतर अस्पताल में भर्ती होने की क्षतिपूर्ति पॉलिसियों में होती है लेकिन व्यक्तिगत दुर्घटना पॉलिसियों को भी धोखाधड़ीपूर्ण दावे करने में इस्तेमाल किया जाता है।

21. टीपीए बीमा कंपनी को कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है और फीस के रूप में पारिश्रमिक प्राप्त करता है।

 इ कौशलेन्द्र प्रताप सिंह से मिलें--

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